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बिजली डिस्कनैक्शन के नियम: कब और क्यों कटेगा कनैक्शन

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आज हम एक जरूरी विषय के बारे में बात करने जा रहे हैं जो है “बिजली डिस्कनैक्शन के नियम”। आमतौर पर हमें लगता है कि सिर्फ बिजली का बिल न भरने के कारण ही विद्युत विभाग द्वारा बिजली का कनैक्शन काटा जा सकता है । परन्तु 10 से ज्यादा एसी अलग-अलग वजहें है जिनके आधार पर विद्युत विभाग किसी भी उपभोक्ता की बिजली काट सकता है । इस लेख में हम न केवल बिजली कनेक्शन काटने के नियम के बारे में जानेगें बल्कि यह भी जानेगें कि अस्थायी डिस्कनैक्शन और स्थायी डिस्कनैक्शन में क्या अंतर होता है ? बल्कि यह भी जानेगें कि एक बार बिजली कट जाने के बाद दोबारा जुड़वाने के लिए कितना शुल्क देना पड़ता है ।

बिजली डिस्कनैक्शन के नियम

किसी भी विद्युत कनैक्शन को काटने का अधिकार विद्युत विभाग या बिजली बोर्ड को भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 से मिलता है । परंतु बिजली का कनैक्शन काटने के लिए विद्युत विभाग जैसे हिमाचल बिजली बोर्ड को नियमानुसार (HP Supply Code 2009) ही कार्यवाही करनी पड़ती है ।

एक आम उपभोक्ता को समस्या न हो इसलिए उसे विद्युत नियमों कि जानकारी के साथ-साथ अपने विद्युत अधिकारों और कर्तव्यों का भी ज्ञान होना चाहिए ।

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विद्युत उपभोक्ता अधिकार

आज के लेख का विषय रहेगा कि बिजली डिस्कनैक्शन के नियम क्या हैं और कब और किन परिस्थितियों में एक विद्युत कनैक्शन को काटा जा सकता है ।

विषय सूची

(1)बिजली डिस्कनैक्शन क्या होता है?

जब भी उपभोक्ता नया विद्युत कनैक्शन का आवेदन करता है तो विद्युत विभाग के साथ A&A फॉर्म पर विद्युत विभाग के साथ अनुबंध / एग्रीमेंट करता है जिससे हर उपभोक्ता विद्युत नियमों और एग्रीमेंट की शर्तों की पालना करने के लिए बाध्य बन जाता है ।

जब कोई उपभोक्ता विद्युत नियमों या एग्रीमेंट की सेवा शर्तों की पालना नहीं करता है तो विद्युत विभाग उस उपभोक्ता की विद्युत आपूर्ति को काट कर अपने मुख्य डिस्ट्रिब्यूशन से अलग कर देता है । जिसे विद्युत विच्छेदन या बिजली काटना कहते हैं।

परंतु बिजली डिस्कनैक्शन के भी कुछ नियम होते हैं और विद्युत विभाग को भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 और अपने विद्युत आपूर्ति संहिता (Electricity Supply Code) के उन नियमों के अनुसार ही बिजली काटने की कार्यवाही करनी पड़ती है । जैसे समान्यत: किसी भी उपभोक्ता की बिजली काटने से पहले उसको 15 दिनों का नोटिस देना अनिवार्य है ।

(2) विद्युत डिस्कनैक्शन कितने प्रकार का होता है ?

बिजली डिस्कनैक्शन दो प्रकार का होता है स्थायी डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) और अस्थायी डिस्कनैक्शन (Temporary Disconnection) । आइये दोनों के बारें में विस्तार से जानते हैं ।

(i) स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) क्या होता है ?

स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन में उपभोक्ता की विद्युत आपूर्ति स्थायी रूप से काट दी जाती है और बिजली के मीटर को उखाड़ लिया जाता है ।

इस स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) में एक तय सीमा के बाद बिजली मीटर के अलावा उसकी सर्विस लाइन और अन्य उपकरण भी हटा लिए जाते हैं ।

एक बार विद्युत कनैक्शन स्थायी (Permanent ) कट जाए तो 365 दिनों के अंदर उपभोक्ता उसको बहाल करने का ऑनलाइन आवेदन कर सकता है जिसकी अपनी एक प्रक्रिया होती है और जब तक प्रक्रिया पूरी न हो उपभोक्ता किसी भी तरह से बिजली का उपयोग नहीं कर सकता ।

अगर आप स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन के बाद दोबारा कनैक्शन जोड़ने की प्रक्रिया जानना चाहते हैं तो नीचे दिया लेख पढ़ सकते हैं ।

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किन परिस्थितियों में स्थायी विद्युतडिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) किया जाता है :

स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) समान्यत: तीन परिस्थितियों में किया जाता है :

  1. जब उपभोक्ता अपने बिजली के मीटर को उखाड़ने का खुद आवेदन करें । स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) के लिए उपभोक्ता को 250/- रुपेय का शुल्क भी चुकाना होता है ।
  2. अस्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Temporary) के 6 महीने तक भी अगर बिजली के बिल का भुगतान नहीं होता है तो ऐसी परिस्थिति में स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन किया जाता है ।
  3. जब कभी माननीय अदालतों से मीटर उखाड़ने के आदेश प्राप्त हों ।

स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन के बाद दोबारा कनैक्शन चालू करवाने का कितना खर्च आता है ?

बिजली डिस्कनैक्शन के नियम के अनुसार स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन के बाद दोबारा विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए उपभोक्ता को वो सारे विद्युत शुल्क चुकाने पड़ेंगे जो एक नये विद्युत कनैक्शन लेने के समय चुकाने पड़ते है ।

अंतर सिर्फ इतना है कि उपभोक्ता को सिर्फ कागजी कार्यवाही कम करनी पड़ती है बाकी उसे वह सभी शुल्क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्जेज(IDC),  नॉर्मेटिव सर्विस कनैक्शन चार्जेज़ और विद्युत सिक्योरिटी डिपॉजिट(ACD) चुकाने पड़ते हैं जो एक नया बिजली का कनैक्शन लेने के समय चुकाने पड़ते हैं ।

स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन के बाद सभी शुल्क चुकाने का स्पष्टीकरण चीफ़ इंजीनियर कमर्शियल की अधिसूचना क्रमांक HPSEBL/CE(Comm.)LS-Genl./2014-2015-21701-22030 dated 31.03.2015 द्वारा दिया जा चुका है।

(ii) अस्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Temporary Disconnection) क्या होता है ?

अस्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Temporary Disconnection) में उपभोक्ता की बिजली को बिना मीटर उखाड़े सर्विस लाइन से या बिजली के खंबे से काटा जाता है । अगर उपभोक्ता अपना बिजली का बिल तय दिनांक के बाद 15 दिनों के नोटिस अवधि खतम होने के बाद भी नहीं भरता तो बिजली विभाग उसकी बिजली का अस्थायी डिस्कनैक्शन कर सकता है ।

अस्थायी डिस्कनैक्शन ((Temporary Disconnection) हो जाने के बाद भी अगर उपभोक्ता 6 महीनों तक बिजली का बिल नहीं भरता तो उसका स्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Permanent Disconnection) किया जा सकता है ।

अस्थायी विद्युत डिस्कनैक्शन (Temporary Disconnection) के बाद दोबारा कनैक्शन चालू करवाने का कितना शुल्क लगता है ?

अस्थायी डिस्कनैक्शन के बाद उपभोक्ता को दोबारा अपने विद्युत कनैक्शन को चालू करवाने के लिए अपने पूरे बिल के भुगतान के साथ-साथ पुन: संयोजन शुल्क (Reconnection Fee ) का भी भुगतान करना होता है सिर्फ बिल भर देने से कनैक्शन दोबारा चालू नहीं होगा ।

आपको अस्थायी डिस्कनैक्शन के बाद कितने शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा वह आपके विद्युत कनैक्शन की श्रेणी पर निर्भर करता है :

श्रेणी (Category) मांग (Contract Demand)री-कनेक्शन शुल्क (₹)
लघु औद्योगिक उपभोक्ता50 kVA तक (≤ 50 kVA)₹ 500
मध्यम औद्योगिक उपभोक्ता50 kVA से अधिक और 100 kVA तक (> 50 kVA और ≤ 100 kVA)₹ 1,000
बड़े औद्योगिक उपभोक्ता100 kVA से अधिक (> 100 kVA)₹ 1,500
अन्य सभी श्रेणियाँ₹ 250

(3)स्मार्ट मीटर के लिए बिजली डिस्कनैक्शन के नियम :

स्मार्ट मीटर के लिए विद्युत डिस्कनैक्शन के लिए विशेष प्रावधान है । स्मार्ट मीटर क्या होते हैं उस पर हमने विस्तृत लेख लिखा है । जिसका लिंक आपकी सुविधा के लिए नीचे दिया है। अगर आप स्मार्ट मीटर के बारे में नहीं जानते पूरा लेख पढ़ सकते हैं।

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स्मार्ट बिजली मीटर क्या है

हिमाचल प्रदेश विद्युत आपूर्ति (छठा संशोधन) संहिता, 2025 में स्मार्ट प्रीपैड मीटर के लिए खास प्रावधान है जिसके अनुसार अगर उपभोक्ता के खाते में बैलेंस खत्म हो जाने के कारण उसकी विद्युत आपूर्ति ऑटोमैटिक कट-ऑफ  हो जाती है तो उसे अस्थायी डिस्कनैक्शन (Temporary Disconnection) नहीं माना जाएगा और यदि सात दिनों के भीतर रिचार्ज करने पर आपूर्ति बहाल हो जाती है, तो कोई दोबारा पुन: संयोजन (Reconnection Fee ) शुल्क नहीं लिया जायेगा ।

 (4) किन परिस्थितियों में बिजली कनेक्शन कट सकता है?

हमें लगता है सिर्फ बिजली का बिल न भरने की वजह से ही बिजली का कनैक्शन कट सकता है परंतु सच यह है कि ऐसी बहुत सी परिस्थितियाँ हैं जिसमें विद्युत विभाग के पास किसी उपभोक्ता की बिजली काटने के अधिकार हैं :

 (i) बकाया और अन्य शुल्कों का भुगतान न करना:

अगर आप अपने बिजली के बिल का भुगतान नहीं करते या फिर किसी भी ऐसे शुल्क का भुगतान नहीं करते जो आपके तरफ से बिजली बोर्ड को दिया जाना है तो 15 दिनों के नोटिस के बाद आपके बिजली के कनैक्शन को काटा जा सकता है ।

(ii) जुर्माने की राशि का भुगतान न करना :

अनाधिकृत बिजली चोरी के मामलों में,जब सक्षम अधिकारी द्वारा बिजली चोरी के जुर्माने का निर्धारण किया जाता है अगर उस निर्धारित की राशि का भुगतान संबन्धित उपभोक्ता द्वारा नहीं किया जाता है या किस्तों में चूक होती है, तो विद्युत विभाग  कम से कम पंद्रह दिन का स्पष्ट नोटिस देने के बाद उसकी बिजली काट सकता है ।

(iii) निरीक्षण या मीटर रीडिंग के लिए प्रवेश की अनुमति से इनकार:

अगर कोई उपभोक्ता विद्युत विभाग के अधिकृत कर्मचारी को  निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत या मीटर रीडिंग के लिए अपने परिसर में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार करता है, तो चौबीस घंटे का लिखित नोटिस देने के बाद उसकी विद्युत आपूर्ति को अस्थायी रूप से काटा जा सकता है ।

(iv) उपभोक्ता का परिसर बंद पाये जाने पर :

अगर बिजली का मीटर परिसर के अंदर लगा है और मीटर रीडर को परिसर अधिकतर बंद मिलता है और ‘उपभोक्ता के परिसर तक पहुंच’ का नोटिस देने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिलता है तो जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) या मीटर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के बाद उस उपभोक्ता की बिजली खंबे से काटी जा सकती है ।

(v) बिजली चोरी का पता चलने पर :

अगर बिजली चोरी का मामला ( Under Section 135) पाया जाता है तो विभाग बिना नोटिस दिये तुरंत बिजली काट सकता है ।

(vi) बिजली की अनाधिकृत बहाली:

अगर पहले से ही बिजली के बिल का भुगतान न होने के कारण बिजली का कनैक्शन काटा गया है और उपभोक्ता अपने आप उसको जोड़ लेता है या किसी दूसरे के बिजली के कनैक्शन से विद्युत आपूर्ति बहाल कर लेता है तो ऐसे मामलों को बिजली चोरी (Theft of Electricity) माना जाता है और उस दूसरे कनैक्शन की भी विद्युत आपूर्ति काट दी जाएगी ।

(vii) उपभोक्ता के अनुरोध पर:

अगर उपभोक्ता चाहे तो अपनी बिजली कटवा सकता है । इसके लिए उपभोक्ता को लिखित में अनुरोध करना होता है और निर्धारित शुल्क जमा करवा कर अपनी बिजली स्थायी या अस्थायी तौर पर कटवा सकता है ।

(viii) खतरे या क्षति को रोकने के लिए:

अगर कोई ऐसी स्थिति बनती है जिससे विद्युत आपूर्ति चालू रहने से किसी मानव या पशु के जनोमाल के नुकसान होने की संभावना बनती है तो बिजली विभाग बिना नोटिस दिये पूरी विद्युत आपूर्ति को बंद कर सकता है ।

(ix) वैधानिक/कानूनी आदेशों की वजह से :

विद्युत विभाग को अगर किसी भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किसी उपभोक्ता के विद्युत कनैक्शन को काटने के वैधानिक या कानूनी आदेश/निर्देश मिलते हैं तो विद्युत विभाग को उन आदेशों की पालना करनी होगी और विद्युत आपूर्ति को काटना की पड़ेगा।

(x) उपभोक्ता के परिसर में लीकेज के कारण:

अगर किसी के घर की अंदरूनी वाइरिंग के फ़ाल्ट की वजह के करंट का रिसाव हो रहा है जिससे दूसरों को खतरा हो तो जब तक वह फ़ाल्ट /नुक्स उपभोक्ता ठीक नहीं करवा लेता तब तक उसकी विद्युत आपूर्ति काटी जा सकती है ।

(xi) विद्युत निरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार दोषों को ठीक करने में विफलता:

अगर कोई उपभोक्ता विद्युत निरीक्षक (Electrical Inspector) द्वारा बताए गए दोषों/त्रुटियों को निर्धारित समय के भीतर ठीक नहीं करता है , तो कम से कम अड़तालीस घंटे का नोटिस देने के बाद उसकी विद्युत आपूर्ति को डिस्कनेक्ट किया जा सकता है।

(xii) निर्धारित मानकों से अधिक हार्मोनिक्स पैदा करना:

हमारी कई इलेक्ट्रॉनिक्स मशीने होती है जो अपने आप एक खास तरह का डिस्टर्बेंस सिगनल बनाती हैं जो विद्युत को प्रभावित करती है जिसे हार्मोनिक्स कहा जाता है ।

अगर यह हार्मोनिक्स सिगनल निर्धारित मानकों से अधिक होते हैं तो वह पूरी विद्युत प्रणाली पर बहुत बुरा असर डालते है जिस वजह से विद्युत विभाग के पास अधिकार होता है उस उपभोक्ता की बिजली काटने का ।

(xiii) मानक आपूर्ति वोल्टेज से कम वोल्टेज पर बिजली लेना :

हिमाचल प्रदेश विद्युत आपूर्ति (छठा संशोधन) संहिता, 2025 के अनुसार अगर कोई मौजूदा उपभोक्ता, जो 01-04-2025 को मानक आपूर्ति वोल्टेज से कम वोल्टेज पर बिजली ले रहा है और 01-03-2027 तक या उससे पहले प्रासंगिक मानक आपूर्ति वोल्टेज पर स्विच करने का विकल्प नहीं चुनता है तो इस स्थिति में, उपभोक्ता को 30 दिनों का नोटिस देने के बाद उसकी विद्युत आपूर्ति काटी जा सकती है ।

अगर उपभोक्ता को लगता है कि उसकी बिजली बिना किसी कारण या बिना नियमों का अनुसरण किए काटी गयी है तो इसकी शिकायत वह उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (Consumer Grievance Redressal Forum) या विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) के पास कर सकता है और अपने विवाद को सुलझा सकता है ।

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(5) निष्कर्ष:

अब आप समझ ही गए होंगे कि बिजली डिस्कनैक्शन के नियम केवल बिल न भरने तक सीमित नहीं हैं बल्कि इसके पीछे कई अन्य परिस्थितियाँ भी होती हैं। एक जिम्मेदार उपभोक्ता के रूप में हमें न केवल समय पर बिल का भुगतान करना चाहिए बल्कि विद्युत नियमों और एग्रीमेंट की शर्तों का भी पालन करना चाहिए।

ऐसा करने से न तो हमारी बिजली कटेगी और न ही किसी तरह की असुविधा होगी। याद रखिये, बिजली सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है, और नियमों की जानकारी होना ही किसी भी उपभोक्ता का सबसे बड़ा अधिकार है।

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(6) FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ):

  1. बिजली डिस्कनैक्शन क्या होता है?

    जब उपभोक्ता विद्युत नियमों या अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करता तो उसकी विद्युत आपूर्ति काट दी जाती है, इसे ही बिजली डिस्कनैक्शन कहते हैं

  2. बिजली डिस्कनैक्शन कितने प्रकार का होता है?

    दो प्रकार का – स्थायी (Permanent) और अस्थायी (Temporary)।

  3. स्थायी डिस्कनैक्शन कब किया जाता है?

    जब उपभोक्ता खुद आवेदन करे, 6 महीने तक बिल न भरे, या अदालत के आदेश पर।

  4. अस्थायी डिस्कनैक्शन के बाद दोबारा बिजली चालू कराने का शुल्क कितना है?

    यह उपभोक्ता की श्रेणी पर निर्भर करता है, जैसे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ₹250 और अन्य श्रेणियों के लिए अलग-अलग शुल्क तय हैं।

  5. क्या स्मार्ट मीटर में भी डिस्कनैक्शन होता है?

    हाँ, लेकिन स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने पर जो ऑटोमैटिक कट-ऑफ होता है, उसे अस्थायी डिस्कनैक्शन नहीं माना जाता।

  6. क्या सिर्फ बिल न भरने पर ही बिजली कट सकती है?

    नहीं, इसके अलावा भी कई कारण हैं जैसे बिजली चोरी, मीटर निरीक्षण से इनकार, सुरक्षा कारण, या कानूनी आदेश।

  7. बिजली डिस्कनैक्शन के नियम क्या कहते हैं—नोटिस कितने दिन पहले देना आवश्यक है?

    सामान्यतः बिजली काटने से पहले उपभोक्ता को कम से कम 15 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है।

  8. क्या बिजली चोरी या अनाधिकृत उपयोग के मामले में बिना नोटिस बिजली काटी जा सकती है?

    हाँ, अगर बिजली चोरी या अनाधिकृत उपयोग का मामला सामने आता है तो विभाग बिना नोटिस के तुरंत बिजली काट सकता है।

  9. अगर घर बंद हो और मीटर रीडिंग न हो पाए तो क्या बिजली काटी जा सकती है?

    हाँ, यदि बार-बार नोटिस देने के बाद भी परिसर तक पहुंच नहीं मिलती तो विभाग अस्थायी तौर पर बिजली काट सकता है।

  10. अगर उपभोक्ता को लगता है कि उसकी बिजली गलत तरीके से काटी गई है तो क्या करना चाहिए?

    उपभोक्ता उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (Consumer Grievance Redressal Forum) या विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) के पास शिकायत कर सकता है।

  11. क्या बिजली के अस्थायी डिस्कनैक्शन से सप्लाई एग्रीमेंट भी खत्म हो जाता है?

    नहीं, अस्थायी तौर से बिजली काटने से सप्लाई एग्रीमेंट अपने आप खत्म नहीं होता। यह तभी खत्म होता है जब विभाग नियमानुसार स्थायी डिस्कनैक्शन कर दे।

  12. क्या कोई मकान मालिक या सोसाइटी बिजली काट सकती है?

    नहीं, बिजली आवश्यक सेवा है और केवल बिजली बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी ही नियमानुसार इसे काट सकते हैं।

  13. बिजली से जुड़े नियम—नया कनेक्शन, बिलिंग, डिस्कनैक्शन और री-कनेक्शन की जानकारी कहाँ मिलेगी?

    इसके लिए भारतीय विद्युत अधिनियम 2003, Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020 और राज्य की बिजली सप्लाई कोड (जैसे HP Supply Code) में सभी प्रावधान दिए गए हैं।

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