जब से सरकार ने पुराने बिजली के मीटरों को स्मार्ट बिजली मीटर से बदलना शुरू कर दिया है वैसे -वैसे पूरे देश , प्रदेश में घमासान शुरू हो गया है । बहुत सारे ऐसे वाक्य समाचार और सोशल मीडिया पर छाये रहते हैं जिसमें आम जनता स्मार्ट बिजली मीटर का लगातार सरेआम विरोध कर रही है, और कहीं -कहीं तो बिजली बोर्ड कर्मचारियों और आम जनता के बीच झड़पों के भी समाचार आये हैं । इसका मुख्य कारण है सही जानकारी न होने की वजह से स्मार्ट मीटर से डर और संशय। आज हमारी कोशिश रहेगी की इस विषय में सही जानकारी आप तक पहुंचाई जाये । इस लेख में हमारा मुख्य केंद्र यह समझना रहेगा कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या है, तकनीकी दृष्ठि से यह पुराने बिजली के मीटर से अलग कैसे है और सरकारें क्यों पुराने बिजली के मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलना चाहती हैं ।

यह बहुत रोचक है कि हम सभी चाहते है कि जीतने भी उपकरण हम प्रयोग में लाते है वह स्मार्ट हों । सब स्मार्ट मोबाइल फोन लेना चाहते हैं , सभी अपने घरों में स्मार्ट TV , स्मार्ट एयर कंडीशनर, स्मार्ट वॉच , स्मार्ट पंखे चाहते हैं । लेकिन स्मार्ट बिजली के मीटर के मामले में हम पीछे हट रहे हैं तो असल कारण क्या है इसे अपने अंदर झांक कर सोचें ?
हमें लगता है कि अगर कोई उपकरण स्मार्ट हो रहा है तो उसका मकसद काम आसान करना है स्मार्ट मीटर का विरोध का मुख्य कारण एक खास तरह का डर और शंकाएँ है जो स्मार्ट बिजली मीटर के सही ज्ञान के अभाव में पनपती हैं ।

इस से पहले कि हम यह जानें कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या है? उस से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि क्यों सरकार स्मार्ट बिजली के मीटर लाना चाहती है। पुराने बिजली के मीटर में आखिर ऐसी क्या खराबी है जिस वजह से हजारों करोड़ खर्च कर सरकार सभी पुराने बिजली के मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने पर उतारू है ।
बिजली के स्मार्ट बिजली मीटर का अधिकांश खर्च केंद्र सरकार उठा रही है । सभी के मन में यह प्रश्न उठ रहें है कि क्यों सरकार पूरे देश में स्मार्ट बिजली मीटर लाने के लिए इतनी उतावली है । अगर इस बात को समझना है तो हमें भावनात्मक सोच के बजाये तर्कसंगत सोच के आधार पर तथ्यों को देखना और परखना होगा ।
हमने अपने एक पुराने लेख में समझाया था कि “बिजली की बचत क्यों जरूरी है” । इसमें हमने समझाया था कि बिजली के बनने से लेकर उसके हमारे घरों तक पहुँचने तक तकनीकी कारणो कि वजह से उसका बहुत सा हिस्सा क्षय (बर्बाद) हो जाता है जिसे एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस कहते हैं ।
एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस क्या है ?
क्या आप जानते हैं पावर लाइन रिपोर्ट के मुताबिक एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस कि वजह से भारत को हर साल तकरीबन 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है और वर्ष 2022-2023 में यह बढ़ कर 6.48 लाख करोड़ रुपये पहुँच चुका था ।
यह इतनी बड़ी राशि है कि अगर हर परिवार में राशि बराबर बांटी जाये तो हर परिवार के हिस्से 22,024 रुपये आते हैं क्योंकि भारत में कुल परिवारों कि अनुमानित संख्या 29.43 करोड़ है । और आप भी अच्छी तरह से जानते हैं कि यह लाखों करोड़ की भरपाई हमारी ही जेब से होती है ।
तो प्रश्न यह उठता है कि इस सारी कहानी का स्मार्ट बिजली मीटर का इस लाखों करोड़ के हर साल के एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) घाटे से क्या संबंध है? संबंध है जनाब और बड़ा गहरा संबंध है । एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस दो तरह के लॉस (घाटे) से बना है टेक्निकल लॉस (Technical Loss) और वाणिज्यिक घाटा (Commercial Loss)
टेक्निकल लॉस (Technical Loss):
यह वह नुकसान है जो बिजली को पावर प्लांट से आपके घर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से ऊर्जा या बिजली की बरबादी (क्षय) होती है जिसे टेक्निकल लॉस (Technical Loss) कहा जाता है .टेक्निकल लॉस बिजली के तारों, ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों में गर्मी (heat) के रूप में ऊर्जा के क्षय के कारण होता है ।
वाणिज्यिक घाटा (Commercial Loss):
वाणिज्यिक घाटा (Commercial Loss) वह घाटा है जो बिजली चोरी , मीटर के साथ छेड़छाड़, बिजली की खपत की गलत बिलिंग और बिल चुकाने में देरी या डिफॉल्ट की वजह से होता है । आपको जान कर हैरानी होगी बिजली चोरी के मामलों में भारत विश्व में अग्रणी स्थान रखता है और हर साल लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपेय की बिजली चोरी भारत में होती है ।

तो आप समझ ही गए होंगे कि वाणिज्यिक घाटा (Commercial Loss) का कारण मानवीय हस्तक्षेप से जुड़ा है और इसी कि रोकथाम के लिए सरकार स्मार्ट बिजली मीटर को घर – घर में लाना चाहती है । अगर आप ईमानदार हैं और अपने बिजली का बिल समय पर भरते हैं तो आपको स्मार्ट मीटर से डरने कि जरूरत नहीं बस जरूरत है इस नयी तकनीक को जानने की ताकि आपके सारी शंकाएँ दूर हो सकें और इसे अपनाने में आपको कोई हिचक न रहे । आइये जानते हैं कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या है ? और कैसे यह वाणिज्यिक घाटा (Commercial Loss) को कम करने में मदद कर सकता है ।
(2) स्मार्ट बिजली मीटर क्या है?
स्मार्ट बिजली मीटर और आपके लगे पुराने ईलेक्ट्रोनिक मीटर दोनों ही एक डिजिटल उपकरण है, जो आपके घर या दफ्तर में इस्तेमाल हो रही बिजली की खपत को मापने के लिए उपयोग होता है । परंतु पुराने ईलेक्ट्रोनिक बिजली के मीटर के मुक़ाबले इसमें कुछ खास विशेषताएँ हैं इसमें बिल बनाने के लिए किसी इंसान द्वारा मीटर तक जा कर मैन्युअल रीडिंग लेने की ज़रूरत नहीं होती। यह बिजली की खपत, वोल्टेज, करंट और पावर फैक्टर जैसी जानकारी रियल-टाइम में रिकॉर्ड करता है और सीधे डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) तक भेज देता है।

स्मार्ट बिजली मीटर को “स्मार्ट” क्यों कहा जाता है?
स्मार्ट बिजली के मीटर और पुराने बिजली के इलेक्ट्रोनिक मीटर में आधारभूत अंतर यह कि स्मार्ट बिजली मीटर अपने आप अपने अंदर की विद्युत जानकारी का आदान- प्रदान रियल-टाइम में बिजली बोर्ड के साथ कर सकता है । विद्युत खपत को मापने के अलावा इसकी यही संचार कर पाने की खूबी इसको स्मार्ट बनाती है । इसकी कुछ मुख्य विशेषताएँ हैं:

- हर महीने मीटर रीडिंग लेने के लिए मीटर रीडर का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। स्मार्ट मीटर स्वतः ही अपनी रीडिंग भेजने में सक्षम है जिससे बिजली बिल हमेशा विद्युत खपतानुसार ही बनेगे । मानवीय चूक के कारण जो गलत बिजली के बिल बनते थे या उपभोक्ताओं को बिल ही नहीं बनते थे अब वह समस्या खतम हो जाएगी ।
- स्मार्ट बिजली मीटर दो-तरफ़ा संचार से विद्युत विभाग से जुड़े होते हैं जिससे यह बिजली से जुड़ी जानकारी जैसे खपत, वोल्टेज, करंट और पावर फैक्टर को रियल-टाइम में विद्युत विभाग को भेज सकते हैं और विद्युत विभाग से भी कनैक्शन /डिसकनैक्शन कमांड ले सकते हैं ।
- स्मार्ट बिजली मीटर की यही खूबी से उपभोक्ता अपने मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल पर अपने पल-पल की विद्युत खपत को देख सकते हैं जिससे पारदर्शिता और बड़ेगी ।
- स्मार्ट मीटर बिजली के फ़ाल्ट , मीटर के साथ छेड़-छाड़ और बिजली चोरी की सूचना देने में भी सक्षम हैं।

स्मार्ट बिजली मीटर कितनी तरह के होते हैं ?
शायद अपने देखा हो शुरुआत में लोहे के बिजली के मीटर आते थे जिसमें एक गोल चक्का घूमता रहता था उन्हे इलेक्ट्रोमैकेनिकल मीटर कहा जाता था और आप में से बहुत से लोगों ने वह देखा भी होगा । उसके बाद आये इलेक्ट्रोनिक बिजली के मीटर जो प्लास्टिक के पारदर्शी बॉडी के होते हैं और उनमें डिजिटल डिस्प्ले होती है ।

अब आये हैं स्मार्ट बिजली मीटर , यह मीटर न केवल रीडिंग अपने डिजिटल डिस्प्ले में दिखाते हैं बल्कि अपनी रीडिंग को विद्युत विभाग को स्वयं ही भेज सकते हैं । स्मार्ट बिजली मीटर भी दो तरह के होते हैं प्रीपेड स्मार्ट मीटर और पोस्टपेड स्मार्ट मीटर :
- प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर : प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर वह मीटर हैं जिनमें आपको पहले रीचार्ज करना पड़ता है जितने का रीचार्ज होगा उतने की ही विद्युत खपत की जा सकती है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर का फ़ायदा यह है कि इसमें विद्युत दरें पॉस्टपेड की तुलना में सस्ती होती हैं ।
- पोस्टपेड स्मार्ट बिजली मीटर : पॉस्टपेड मीटर पूरे महीने आपकी रोजना की विद्युत खपत को विद्युत विभाग में भेजता है और एक महीने के बाद आपकी मासिक बिजली की खपत के अनुसार बिजली का बिल बनता है बस इसमें मीटर की रीडिंग लेने कोई आपके घर नहीं आता ।

(3) स्मार्ट बिजली मीटर का विरोध क्यों हो रहा है ?
जैसा की हम पहले बता ही चुके हैं कि स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर में विद्युत खपत को मापने के आधार पर कोई ज्यादा अंतर नहीं है । बस स्मार्ट मीटर में पुराने इलेक्ट्रोनिक मीटर के मुक़ाबले संचार करने की काबलियत है । जिस से वह विद्युत बोर्ड के साथ जुड़ा रह सकता है और अपने विद्युत खपत के डेटा को स्वयं ही विद्युत बोर्ड को भेज सकता है और साथ ही साथ विद्युत प्रदाता कंपनी से कमांड भी प्राप्त करने में भी सक्षम है ।

फिर प्रश्न उठता है कि स्मार्ट मीटर का हर तरफ विरोध क्यों हो रहा है जबकि आज के AI के जमाने में हम हर तरह के स्मार्ट उपकरणों को बड़ी जल्दी अपना रहे हैं। जैसे हम में कोई विरला ही होगा जो स्मार्ट फोन की जगह पुराने मोबाइल फोन का प्रयोग करना चाहता है ।
हम पहले ही बता चुके हैं कि सरकारों के लिए स्मार्ट मीटर का क्या महत्व है और क्यों यह जरूरी है । स्मार्ट मीटर के विरोध के मुख्य दो कारण हैं :
- पहला कारण नयी तकनीक के प्रति सही जानकारी न होने के कारण भय है । अगर आप ईमानदार हैं और अपना बिजली का बिल समय पर भरते हैं तो स्मार्ट मीटर से डरने की जरूरत नहीं है।
- दूसरा कारण है अफवाहें । अपने निरंतर सोशल मीडिया या समाचार पत्रों में सुना होगा कि स्मार्ट बिजली मीटर का बिल बहुत ही ज्यादा आता है जिनका पहले बिजली का बिल 200 और 300 रुपेय आता था स्मार्ट बिजली का मीटर लगने के बाद उनका बिजली का बिल सीधा 5000 या 10000 रुपेय का आना शुरू हो गया । क्या यह सच है? या सिर्फ अफवाहें । अगर सच है तो क्या कारण है हम जानने की कोशिश करते हैं ।
(4) क्या सच में स्मार्ट बिजली के मीटर से बहुत ज्यादा बिल आता हैं ?
स्मार्ट बिजली मीटर के विरोध में जो खबरें सामने आ रही हैं उन सब में ज्यादा कर यह सामने आया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों के बिजली के बिल हजारों में आना शुरू हो गए जबकि पहले बिल बहुत कम आते थे । जबकि पुराने इलेक्ट्रोनिक बिजली मीटर और स्मार्ट बिजली मीटर के विद्युत खपत को मापने की तकनीक में कोई खास अंतर नहीं है ।
फिर ऐसी क्यों शिकायतें बार-बार आ रही हैं कि स्मार्ट बिजली मीटर लगने के बाद लोगों के बिजली बिलों में बहुत सारी बढ़ोतरी हो रही है तो इसके दो मुख्य कारण हैं और दोनों कारणों में मानवीय चूक ही शामिल है :
- पहले पुराने मीटर की सही बिलिंग न होना : जैसा की हम जानते हैं कि पुराने बिजली के मीटर से बिल बनाने के लिए मीटर की मैन्युअल रीडिंग लेनी पड़ती थी और यह रीडिंग विभाग के बिल क्लर्क या कर्मचारी द्वारा ली जाती थी और बिल बनाए जाते थे। बहुत बार ऐसा देखा गया है और हम भी यह जानते हैं कि वह कुछ बिजली कर्मचारी पूरी खपत पर बिल न बना कर थोड़ा-थोड़ा बिल देते रहते थे या बिना रीडिंग लिए ही बिल बना देते थे ताकि उनका बिल बनाने का मासिक टार्गेट पूरा रहे । जिस से उपभोक्ता को अपनी वास्तविक खपत का अंदाजा ही नहीं होता था और उनकी बहुत सी रीडिंग पेंडिंग रह जाती थी । इसलिए जब पुराने बिजली के मीटर को स्मार्ट मीटर से बदला गया तो उनके पुरानी पेंडिंग रीडिंग के साथ -साथ वास्तविक खपत के बिल आने शुरू हुए जिन से वह आक्रोशित हुए ।
- मीटर बदलते समय विद्युत विभाग की चूक : बिजली के मीटर तो स्मार्ट आ गए लेकिन विद्युत विभाग के कर्मचारी तो वहीं हैं जो पहले थे। इसलिए विद्युत विभाग को मीटर के साथ साथ अपने कर्मचारियों को भी “स्मार्ट ” बनाने की जरूरत है । जब पुराने मीटर बदले जाते हैं तो उस समय की उसकी फ़ाइनल रीडिंग रिकॉर्ड में चढ़ती है और अधिकांश समय यह देखा गया है कि उस रीडिंग में ही चूक होने कि वजह से पहला स्मार्ट मीटर का बिल बहुत ज्यादा आता है । और लोग समझ रहें हैं कि स्मार्ट मीटर की वजह से बिल ज्यादा आ रहें हैं जबकि इसके पीछे असल दोष स्मार्ट मीटर का न हो कर मानवीय चूक का है ।
अगर आप इस तरह की परेशानियों से बचना चाहते हैं तो उपभोक्ता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है । आप अपने पास कम से कम पिछले 6 महीनों का बिलिंग रिकॉर्ड रखें जो आपको विद्युत विभाग (HPSEBL) मोबाइल ऐप पर मिल जाएगा ।
और सब से जरूरी जब भी आपका पुराना बिजली का मीटर नए स्मार्ट मीटर से बदला जाए तो पुराने मीटर को उतारते समय उसपर क्या फ़ाइनल रीडिंग थी और और जो नया स्मार्ट मीटर लगाया गया है उसकी शुरुआती रीडिंग क्या है यह रिकॉर्ड अपने पास रखें ताकि किसी मानवीय भूल की वजह से कोई गलत बिल आता है तो उसको सुधारने में कोई परेशानी न आये । अगर आपकी सुनवाई नहीं होती है तो आपको अपने बिजली विवादों के समाधान का तरीका भी पता होने चाहिए।
(5) निष्कर्ष :
अब तक की चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या है और यह पुराने बिजली मीटर से कैसे अलग है। असल में स्मार्ट मीटर से डरने कोई की कोई जरूरत नहीं बल्कि इसको जानने और समझने की ज़रूरत है। स्मार्ट बिजली मीटर न सिर्फ़ पारदर्शिता लायेगा बल्कि बिजली चोरी और बिलिंग की गड़बड़ियों को भी रोकेगा । हाँ, शुरू-शुरू में कुछ दिक़्क़तें आ सकती हैं, पर यह ज़्यादातर मानवीय भूलों के कारण होती हैं, न कि स्मार्ट मीटर की तकनीक की वजह से।
अगर हम सभी ईमानदारी से अपनी खपत का भुगतान करते हैं और थोड़े से सजग रहकर पुराने और नए मीटर की रीडिंग का रिकॉर्ड संभालकर रखते हैं, तो स्मार्ट मीटर को अपनाना हमारे ही हित में है। आने वाले समय में यही तकनीक हमारी बिजली व्यवस्था को और मज़बूत और भरोसेमंद बनाएगी। इसलिए ज़रूरी है कि हम अफवाहों से दूर रहकर सही जानकारी के साथ समझें कि स्मार्ट बिजली मीटर क्या है और इसे खुले मन से स्वीकार करें।
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(6) FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ):
स्मार्ट बिजली मीटर क्या है?
स्मार्ट बिजली मीटर एक डिजिटल मीटर है जो आपकी बिजली खपत का हिसाब अपने-आप बिजली विभाग तक भेज देता है। इसमें मीटर रीडर की ज़रूरत नहीं होती।
क्या स्मार्ट बिजली मीटर से बिल ज़्यादा आता है?
हीं, स्मार्ट मीटर से बिल ज़्यादा नहीं आता। ज़्यादातर मामलों में पहले गलत या अधूरा बिल बनता था। स्मार्ट मीटर असली खपत के हिसाब से बिल बनाता है, इसलिए सही बिल आता है।
क्या स्मार्ट बिजली मीटर से बिजली चोरी रुक जाएगी?
हाँ, स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ पकड़ में आ जाती है। इससे बिजली चोरी बहुत कम होगी।
स्मार्ट मीटर प्रीपेड है या पोस्टपेड?
स्मार्ट मीटर दोनों तरह के होते हैं। प्रीपेड स्मार्ट मीटर: पहले रिचार्ज करो, फिर बिजली इस्तेमाल करो। पोस्टपेड स्मार्ट मीटर: महीनेभर इस्तेमाल करो, फिर बिल भरो।
स्मार्ट बिजली मीटर लगाने से मुझे क्या फ़ायदा है?
आपको पारदर्शी बिल मिलेगा, रियल टाइम खपत मोबाइल ऐप में देख सकते हैं और मीटर रीडर का झंझट नहीं रहेगा।